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student can achieve the highest goal of life by meditation

ध्यान द्वारा ही एक शिष्य जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है

नई दिल्ली। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिल्ली के दिव्य धाम आश्रम में मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया! कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिष्य आध्यात्मिक विकास व ज्ञान वृद्धि की प्राप्ति हेतु एकत्र हुए। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याओं ने श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि आज हर ओर सौन्दर्यए प्रसिद्धि और धन का अंबार होने के बावजूद भी मानव जीवन से असंतुष्ट और दुखी है। वह जीवन में संतुष्टि की प्राप्ति हेतु निरंतर प्रयासत है। सत्संग के माध्यम से जीवन रूपी वाद्ययंत्र को सुर में करते हुए इससे शांति और ज्ञान की सुखद धुनों को निकला जा सकता है। 

सत्संग एक शिष्य को धैर्य, विवेक और साधक की विशेषताओं से पोषित करने हेतु उत्तम साधन है। सत्संग द्वारा साधक समझ पाता है कि जीवन में आने वाली चुनौतियों और कठिनाइयों से संघर्ष कर वह अपने विकास और कल्याण की ओर अग्रसर होता है। कार्यक्रम में साधक के जीवन में सत्संग एवं ब्रह्मज्ञान की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला गया। आत्मा, दिव्य, अमर, जागरूक व आनंद स्वरूप है परन्तु माया द्वारा प्रभावित हो अज्ञानता में लिप्त है। जिस प्रकार एक मदारी बंदर को अपने इशारों पर नचाता है। उसी प्रकार माया भी अपने प्रभाव से जीव को उलझाए रखती है। मानव को सृष्टि का सिरमौर कहा गया है परन्तु आज उसने स्वयं के लिए दासता का जीवन चुना है। संसार की दासताए विचारों की दासताए सांसारिक क्षणिक सुखों की दासता।

ईश्वर का रंग पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित करता है। ईश्वर के रंग का अनुभव करने के लिए स्वयं को उनके रंग में रंगने की आवश्यकता है। वेदों व शास्त्रों के अनुसार एक मानव द्वारा संसार के सभी दुर्लभ उपहारों और अवसरों को प्राप्त करना सहज है परन्तु आध्यात्मिकता के मार्ग पर दृढ़ता से चलने की क्षमता को प्राप्त करना कठिन है। 

जो साधक पूर्ण सतगुरु द्वारा प्रदत निर्देशों के अनुरूप भक्ति के मार्ग पर दृढ़ता से चलता हैए वह निश्चित रूप से अपने आध्यात्मिक लक्ष्य को प्राप्त करता है। वह साधक भाग्यशाली है जो सर्वोच्च शक्ति के अमूल्य रत्नों के साथ अपने जीवन को समृद्ध करने के लिए निरंतर अपने गुरु के कमल चरणों में नमन करता है क्योंकि गुरु के श्री चरण ही उसका सर्वोच्च मार्गदर्शक है और उनके आश्रय के अभाव में आध्यात्मिक उन्नति सम्भव नहीं हो सकती है। ब्रह्मज्ञान पर आधारित नियमित ध्यान के माध्यम से ही एक शिष्य अपने आध्यात्मिक विकास में तीव्रता लाए जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। 

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