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कामयाब हुई दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स डील, अब वॉलमार्ट का हुआ फ्लिपकार्ट

कामयाब हुई दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स डील, अब वॉलमार्ट का हुआ फ्लिपकार्ट

09-05-18 08:05 PM Author J2M Network

नई दिल्‍ली। तमाम अटकलों के बाद आज शाम दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स डील कामयाब हो गई। करीब एक लाख करोड़ रुपए की इस डील के बाद वॉलमार्ट फ‍्लिपकार्ट के 77 फीसदी शेयर्स के मालिक हो गए हैं। वॉलमार्ट और फ्लिफकॉर्ट के डील की पुष्टि सॉफ्टबैंक के सीईओ मासायोशी सन ने की है। आपको बता दें कि फ्लिपकार्ट देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी थी। भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट में फ्लिपकार्ट का 40 फीसदी हिस्‍सा था।

दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा विक्रेता वालमार्ट इंक ने बुधवार को घोषणा की कि वह देश के प्रमुख ई-टेलर फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी 16 अरब डॉलर में खरीद रही है। अराकांसस स्थित मुख्यालय वाली कंपनी ने अमेरिका में एक बयान में कहा, "वालमार्ट, फ्लिपकार्ट की शुरुआती 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 16 अरब डॉलर का भुगतान करेगी, जो भारत में नियामकीय मंजूरियों के अधीन है।"

इस सौदे के तहत वालमार्ट अधिकांश शेयरों का अधिग्रहण कर फ्लिपकार्ट समूह का सबसे बड़ा शेयरधारक बन जाएगी और फ्लिपकार्ट में वालमार्ट के निवेश से कंपनी को अपने उपभोक्ता-केंद्रित मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे भारत में प्रौद्योगिकी के माध्यम से ई-कॉमर्स में बड़ा बदलाव आएगा।

बयान में कहा गया है, "यह निवेश भारत में निरंतर नौकरियों के सृजन और निवेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।"

फ्लिपकार्ट की बाकी की हिस्सेदारी कंपनी के वर्तमान शेयरधारकों के पास रहेगी, जिसमें बिनी बंसल, टेनसेंट होल्डिंग्स लि. टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट एलएलसी और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प शामिल हैं।

बयान में कहा गया है, "यह सौदा वालमार्ट को तेजी से बढ़ते बाजार में स्थानीय कारोबारी नेतृत्व के साथ साझेदारी का मौका देगा।"

इस सौदे पर रीटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा, "पूरे रीटेल उद्योग का प्रतिनिधि होने के नाते, आरएआई की नीति है कि यह व्यक्तिगत कंपनियों के बीच हुई डील्स पर टिप्पणी नहीं करती। लेकिन, कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां एफडीआई नीति के प्रेस नोट 3 के तहत जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं। ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से छूट एवं कीमत निर्धारण में हिस्सा नहीं ले रहीं हैं, जो नीति के खिलाफ है।"

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