आरबीआई की नौकरी ठुकरा कर पत्रकारिता चुनी थी, कुछ ऐसे है हरिवंश

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आरबीआई की नौकरी ठुकरा कर पत्रकारिता चुनी थी, कुछ ऐसे है हरिवंश

Author J2M National Desk    New Delhi 65

नई दिल्ली।  राज्यसभा के उपसभापति रूप में एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह चुन लिए गए। गुरूवार को हुए मतदान में हरिवंश को 125 वोट मिले जबकि बी के हरिप्रसाद को 105 वोट मिले। 

हरिवंश नारायण सिंह की यहां तक का सफर जितनी मुश्किल है उतना रोमांचकारी है। हरिवंश बलिया से आते वे एक किसान परिवार से आते है। 

हरिवंश को सबसे पहले आरबीआई के लिए काम करने का ऑफर आया था जिसका जिक्र आज पीएम मोगी ने भी राज्यसभा में की। लेकिन उन्होंने आरबीआई को ना कह कर पत्रकारिता को चुना। 

हरिवंश ने सबसे पहले एक मैगजीन से अपने सफर की शुरूआत की। साल 1989 में वे प्रबात खबर के संपादक रहे। उस वक्त खबार का सर्कुलेशन 400 था। तभी उन्होंने  माउंटेन मैन दशरथ मांझी को दुनिया से मिलाया। 

चंद्रशेखर के सलाहकार का पद ग्रहण करने की ख़ातिर हरिवंश ने प्रभात खबर से इस्तीफा दिया लेकिन चंद्रशेखर सरकार से कांग्रेस के समर्थन वापसी के बाद फिर से अखबार लौट गए। 

हरिवंश नारायण सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद खास हैं। उनकी जेपी से लेकर चंद्रशेखर के साथ भी काफी नजदीकी थी। 

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज उच्च सदन में उन्हें उपसभापति पद पर निर्वाचित होने के बाद बधाई देते हुए कहा कि वह ‘समाज-कारण’ से जुड़े रहे और ‘राज-कारण’ से दूर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में 30 जून, 1956 को जन्मे हरिवंश को जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही मुंबई में उनका ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समूह में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में 1977-78 में चयन हुआ। वह टाइम्स समूह की साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ में 1981 तक उपसंपादक रहे।

उन्होंने 1981 -84 तक हैदराबाद एवं पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की। 1984 में उन्होंने पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्तूबर तक आनंद बाजार पत्रिका समूह से प्रकाशित ‘रविवार’ साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक रहे।

हरिवंश ने वर्ष 1990-91 के कुछ महीनों तक तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी काम किया।

ढाई दशक से अधिक समय तक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक रहे हरिवंश को नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने राज्यसभा में भेजा। उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है।

राज्यसभा में आज उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में हरिवंश को 125 और उनके समक्ष खड़े हुए विपक्ष के उम्मीदवार बी के हरिप्रसाद को 105 मत मिले।

उपसभापति पद पर निर्वाचित होने के बाद उन्हें सभी दलों के नेताओं ने बधाई दी। किंतु प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई देते समय उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण और लगभग अपरिचित पहलुओं का भी दिलचस्प ढंग से उल्लेख किया।

हरिवंश ने कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं। इनमें ‘दिसुम मुक्तगाथा और सृजन के सपने’, ‘जोहार झारखंड’, ‘झारखंड अस्मिता के आयाम’, ‘झारखंड सुशासन अभी भी संभावना है’, ‘बिहार रास्ते की तलाश’ शामिल हैं।

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