रेगिस्तान में पानी की तलाश जैसा है बांझपन का दर्द, ये टेस्ट जरूर कराएं

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रेगिस्तान में पानी की तलाश जैसा है बांझपन का दर्द, ये टेस्ट जरूर कराएं

Author j2m lifestyle desk    new delhi 444

नई दिल्ली। आधुनिक समाज में परंपराओं को तोड़कर महिलाएं आसमान छू रही हैं। क्या सेना, क्या आईटी सेक्टर महिलाएं हर क्षेत्र में किसी से कम नहीं हैं, लेकिन आज भी कई सामाजिक कुरीतियों के चलते न केवल ग्रामीण बल्कि शहरों में रहने वाली और बड़े-बड़े कॉरपोरेट हाउसेज में ऊंचे पदों पर नौकरी करने वाली महिलाएं भी मानसिक प्रताड़ना से गुजरती हैं। इस मानसिक प्रताड़ना का कारण है- निसंतानता। सदियों तक एक धारणा रही जो बांझपन (निसंतानता) को केवल महिलाओं से जोड़कर देखती रही है। विज्ञान के इस युग में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी आईवीएफ मतलब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ने महिलाओं के इस अभिशाप को थोड़ा कम जरूर किया, क्योंकि आज टेक्नोलॉजी के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है पति-पत्नी में नि: संतानता का कारण कौन है और फिर उपचार किया जा सकता है | सास, ससुर, पति, पड़ोसी, दफ्तर से लेकर यहां तक कि कई मामलों में तो लड़की के घरवाले ही उसे मनहूस करार देते हैं। नि: संतानता की शिकार महिलाएं दो तरह के दर्द से पीड़ित होती हैं एक जो समाज से उन्हें तानों के रूप में मिलता है और दूसरा दर्द वो जो मां न बन पाने के चलते उसके मन के भीतर चलता है।

इंदिरा आईवीएफ के पुणे सेंटर की नि: संतानता एवं आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. निशा पानसरे कहती है कि

नि:संतान महिला का जीवन सिर्फ इतने ही दर्द तक सीमित नहीं रहता। कई मामलों में पुरुष यानी महिला का पति उसका परिवार दूसरी शादी जैसा बड़ा कदम उठा लेते हैं। मतलब नि:संतानता की वजह से महिला के जीवन में दर्द कम नहीं है। मानसिक दर्द के इस जाल में नि:संतानता की शिकार महिला अकेले ही जूझती है। उसकी स्थिति बियाबान रेगिस्ताकन में खड़े होकर पानी खोजते इंसान जैसे हो जाती है, जहां उसे खुद के सिवा कोई दूसरा नजर ही नहीं आता है। हालांकि, वक्त हर दर्द पर मरहम लगाता है। आज के समय में बांझपन यानि नि:संतानता की शिकार महिलाओं की तकलीफ दूर करने में आईवीएफ ने काफी मदद की है।

बांझपन की शिकार महिलाओं की सही जांच के बारे में बताते हुए इंदिरा आईवीएफ के पटेल नगर दिल्ली स्थित सेंटर की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. निताशा गुप्ता कहती है कि ब्लड-हॉर्मोन टेस्ट: सबसे पहले ब्लड टेस्ट और हॉर्मोन टेस्ट कराया जाता है। ब्लड टेस्ट की मदद से एनीमिया जांचा जाता है। हॉर्मोन प्रोफाइल टेस्ट कराया जाता है इसमें फीमेल हार्मोन AMH की वैल्यू पता की जाती है, एएमएच टेस्ट ओवेरियन रिज़र्व यानि अंडाशय (ओवेरी) में अण्डों के बनने की प्रक्रिया को दर्शाता है। कम एएमएच की स्थिति में अण्डे औसत से कम बनते हैं और उनकी गुणवत्ता (क्वालिटी) अच्छी नहीं होती है।

फेलोपियन ट्यूब की जाँच – गर्भधारण की प्राथमिक प्रक्रिया ट्यूब में होती है इसलिए ट्यूब की जांच जरुरी है। युएसजी जाँच में यह देखा जाता है की ट्यूब खुली हुई है या नहीं, कोई इन्फेक्शन तो नहीं है, ट्यूब में विकार होने पर कंसीव करने में समस्या आती है, ट्यूब ब्लॉक होने की स्थिति में आई वी एफ तकनीक कारगर है।

गर्भाशय की जाँच – युएसजी जाँच में यह देखा जाता है की गर्भाशय सही तरीके से कार्य कर रहा है या नहीं।

अंडाशय की जाँच – अंडाशय की जांच कर यह पता लगाया जाता है की अंडे सही से बन रहे है या नहीं साथ ही अंडाशय में कोई विकार नहीं है।

केवल इतनी सी जांचो से महिला में नि: संतानता का पता लगाया जा सकता है, कारण जानने के बाद उपचार संभव है।

इंदिरा आईवीएफ जयपुर सेंटर की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. तनु बत्रा गर्भधारण की उन्नत तकनीको के बारे में बताती हैं

आई यु आई / आई वी एफ/ इक्सी

सामान्य जांचो के बाद भी अगर प्राकृतिक तौर पर गर्भधारण नहीं हो पा रहा तो आईयुआई के तहत स्पर्म्स को साफ कर कथेटर के जरिये सीधे यूटरस में डाला जाता है। 2 -3 बार प्रयास के बाद भी इस तकनीक से गर्भधारण नहीं होने की स्थिति में लेटेस्ट तकनीक आईवीएफ का सहारा लेना चाहिए इसमें फेलोपियन ट्यूब में होने वाली भ्रूण बनने की प्रक्रिया को लैब में किया जाता है आई वी एफ में स्पर्म और एग का निषेचन करवाया जाता है जिससे बने भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है, वे पुरुष जिनके शुक्राणु ज्यादा ख़राब ये बहुत कम है वे इक्सी तकनीक से पिता बन सकते हैं।

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