देश-दुनिया से पहुंचे वैज्ञानिक कर रहे अनुभवों को साझा

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देश-दुनिया से पहुंचे वैज्ञानिक कर रहे अनुभवों को साझा

Author J2M aducation desk    New Delhi 413

लखनऊ। भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आइआइएसएफ) 2018 की शुरुआत के साथ ही  नवाबी नगरी लखनऊ पर विज्ञान एवं तकनीक का रंग चढ़ गया है। देश-दुनिया से पहुंचे वैज्ञानिक अपने अनुभवों को साझा कर रहे हैं। वहीं हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स भी नवभारत के सपने को साकार बनाने में जुट गए हैं। इस आयोजन को लेकर आम लोगों में भी जबर्दस्त उत्साह नजर आ रहा है। लोग आयोजन का हिस्सा बनने को बेताब हैं और चार दिवसीय आयोजन का अनुभव लेने के लिए शनिवार-रविवार की छुट्टी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दरअसल देश में विज्ञान ने कितनी तरक्की की है इसे पहली बात करीब से देख सकेंगे। यही वजह है कि इस पूरे आयोजन को उत्तर प्रदेश ही नहीं देश भर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

चौथे आइआइएसएफ की थीम 'परिवर्तन के लिए विज्ञान रखी गई है। देश में सामाजिक परिवर्तन के मामले में देश के वैज्ञानिक एवं टेक्नोलॉजी संस्थानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीएसआइआर, आइसीएआर, इसरो, डीआरडीओ सहित अन्य संस्थान अपनी उपलब्धियों को गोमती नगर रेलवे स्टेशन ग्राउंड में शुरू हुए मेगा साइंस, टेक्नोलॉजी एवं इंडस्ट्री एक्सपो में प्रदर्शित कर रहे हैं। कहना गलत नहीं होगा कि देश ने विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में अब तक जितनी भी तरक्की की है यहां उसकी झलक एक पंडाल में देखी जा सकती है। 

उधर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुरू हुए मुख्य कार्यक्रम में एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने कृषि के विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। दिल्ली से आये राष्ट्रीय डेयरी इंस्टीट्यूट के डॉ.अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि अधिक दूध उत्पादन के लालच में पशुपालक मवेशियों का ध्यान नहीं रखते। गाय या भैंस के बच्चा देने के तीन सप्ताह पहले और बाद में जितना पौष्टिक आहार दिया जा सकता है देना चाहिए। ऐसा करने से दूध की गुणवत्ता के साथ उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल मवेशियों के साथ ही मानव शरीर को भी नुकसान पहुंचाता है। सुगंधा वर्मा के संचालन में आयोजित कार्यशाला में आरके सिंह, गोपाल कृष्णा, आरआर बी सिंह और कुलदीप सिंह ने पहले सत्र में अपने विचार व्यक्त किए। 
दूसरे सत्र की शुरुआत केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने की। शाही ने कहा कि तहजीब के शहर में किसानों का स्वागत है। वर्ष 2017-18 में 53 लाख क्विंटल गेंहू खरीद हुई और किसानों को 9200 करोड़ खाते में तीन दिन के अंदर भेज दिए गए। 

शाही ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते चार साल में किसानों के लिए बहुत काम किया है। रबी की फसल के लिए एमएसपी तय की गए है। डेढ़ हजार तक कि बढ़ोतरी किसानों के लिएनीति में फैसला है। यह वैज्ञानिक संवाद किसानों के लाभकारी है। विगत वर्षों में एमएसपी तय होती थी पर वह खरीददारी नहीं करते थे। जब से योगी सरकार आई तब से यह शुरू हो गया है। 16 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया गया है। सरकार ने व्यवस्था बनाई है। 15 अक्टूबर तक बीज मिल जाएंगे। किसानों का मिलने वाला अनुदान लंबित न हो। कृषि क्षेत्र में विज्ञान को जोडऩा अनिवार्य है। उत्पादकता बढ़ाने में ध्यान दिया जा रहा है। खेती के लिए समय का पालन बहुत अनिवार्य है। लागत घटा कर उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। नीतिगत फैसला पर बदलाव सुनिश्चित होने लगे है। शीरे को उठाकर सीधे एथनॉल बनाने का काम हो रहा है। मंडी समिति में जैविक बाजार की व्यवस्था है। केमिकल फर्टिलाइजर से पोषकता घट रही है। जैविक खाद का प्रयोग किया जाना चाहिए। पानी की रिसाइक्लिंग की जाना जरूरी है।

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