यौन हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर नोबेल का शांति पुरस्कार

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यौन हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर नोबेल का शांति पुरस्कार

Author J2M Education    New Delhi 311

ओस्लो। नार्वे की नोबेल समिति ने शुक्रवार को इस वर्ष का शांति पुरस्कार कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे और आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकार हुई नादिया मुराद को युद्ध व सशस्त्र संघर्ष के समय महिलाओं के साथ दुष्कर्म व यौन दुर्व्यवहार को समाप्त करने के प्रयास के लिए दिया गया। मुराद(25) इराक से यजीदी कुर्दिश मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वह अल्पसंख्यक समुदाय की उन 3000 लड़कियों व महिलाओं में शामिल थी, जिनके साथ आईएस ने अगस्त 2014 में देश के महत्वपूर्ण शहरों में कब्जा करने के बाद दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न की वारदात को अंजाम दिया था।

वह मलाला युसूफजई की बाद नोबेल पुरस्कार पाने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की महिला है। मलाला को जब 2014 में यह पुरस्कार दिया गया था, वह केवल 17 वर्ष की थी। इराकी सरकार ने इस घोषणा के बाद मुराद को शुभकामना दी है।

दूसरी ओर, मुकावेगे एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनाकोलोजिस्ट) हैं, जिन्हें उनके देश में यौन हिंसा की शिकार पीड़िताओं को बचाने वाले के तौर पर देखा जाता है। उनकी सर्जरी देश में हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है। उन्होंने हजारों पीड़िताओं का इलाज किया है।

नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरित रेइस एंडरसन ने कहा, "नार्वे की राजधानी में शुक्रवार को विजेताओं की घोषणा की गई। उन्हें उनके यौन हिंसा को युद्ध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया गया।"

एंडरसन ने कहा, "डेनिस मुकावेगे ऐसी मददगार व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इन पीड़िताओं की रक्षा में समर्पित कर दिया। नादिया मुराद वह गवाह है, जिन्होंने उनके व अन्य के खिलाफ हुए उत्पीड़न को बयां किया। दोनों ने अपने तरीके से युद्ध के समय होने वाली यौन हिंसाओं को सामने लाने का काम किया है, ताकि अमानवीय कृत्य करने वालों को उनके कुकर्म के लिए दोषी ठहराया जा सके।"

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