अगर शादी से पहले लड़की प्रेग्नेंट तो वो चरित्रहीन, तो फिर लड़का क्या?

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अगर शादी से पहले लड़की प्रेग्नेंट तो वो चरित्रहीन, तो फिर लड़का क्या?

Author j2m lifestyle desk    New Delhi 168

नई दिल्ली। सात मई को हुई सोनम कपूर की 'बिग फैट' पंजाबी वेडिंग का ख़ुमार अभी उतरा भी नहीं था कि उसके दो दिन बाद ही जब नेहा धूपिया ने इंस्टाग्राम पर अंगद बेदी के साथ शादी की फोटो शेयर की तो ज़्यादातर लोगों को पहली बार में यकीन ही नहीं हुआ। सेलिब्रेटी की शादी और वो भी इतने शांत और सरल तरीके से। सोनम कपूर की धूम-धड़ाके वाली शादी से इतर 10 मई 2018 को हुई नेहा और अंगद की शादी बेहद शांत माहौल में हुई। 25 अगस्त को नेहा ने इंस्टाग्राम पर अपनी प्रेग्नेंसी की फोटो डालकर सबको चौंका दिया। नेहा ने इंस्टाग्राम पर प्रेग्नेंसी की फोटो शेयर करते हुए लिखा "एक नई शुरुआत... #हमतीन" एक ओर जहां नेहा और उनके पति को नई जिंदगी के लिए बधाइयां देने वालों की कमी नहीं है, वहीं कई लोगों का कहना है कि वो शादी से पहले ही प्रेग्नेंट थीं और इतनी जल्दबाजी में शादी भी इसीलिए की।

लोगों की राय
the_uniquian नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से उनकी तस्वीर पर कमेंट किया गया है कि 'ये कैसे संभव हो सकता है...अभी कुछ दिन पहले ही तो आपकी शादी हुई थी।'

bikashpattnaikk अकाउंट से लिखा गया है कि शादी से पहले प्रेग्नेंसी, सभ्यता के लिहाज से न तो सही है और न ही स्वीकार्य है। ये सिर्फ नेहा की बात नहीं है, ये सभी के लिए है।

jesyma.n लिखते हैं कि वो पहले से ही प्रेग्नेंट थीं...शायद यही वजह थी कि उन्होंने शादी करने का फैसला लिया।

जब लोगों से ये जानने की कोशिश की गई कि वो शादी से पहले प्रेग्नेंसी के बारे में क्या सोचते हैं तो जवाब में काफी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं।

पारुल गुप्ता के मुताबिक कोई लड़की शादी से पहले मां बन रही है या फिर शादी के बाद, इससे ज़्यादा ये मायने रखता है कि उसे जिम्मेदारी उठानी आनी चाहिए। हालांकि पारुल को इस बात से आपत्ति भी है कि ये सवाल सिर्फ महिलाओं से ही क्यों पूछा जाता है जबकि भागीदारी तो पुरुष की भी होती है। और पुरुषों से भी वो सारे सवाल पूछे जाने चाहिए जो एक औरत से पूछे जाते हैं।

ज़्यादातर लोगों ने शादी से पहले प्रेग्नेंसी को समाज, संस्कार और संस्कृति के विरुद्ध बताया है पर बहुत से लोग ये भी मानते हैं कि ये निजी पसंद-नापसंद का मामला है। आफताब आलम लिखते हैं कि जिम्मेदारी तो दोनों की होनी चाहिए लेकिन अगर ये चलन बढ़ता है तो समाज के लिए अच्छा नहीं होगा। शादी बेईमानी हो जाएगी।

'ये पाप है'
हालांक अविनाश चुग इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका मानना है कि ये पाप है और कुछ लोग इन बातों को आजादी से जोड़कर माहौल को बिगाड़ रहे हैं। शादी जैसे संस्कार को दकियानूसी बताकर दुष्प्रचार किया जा रहा है और समाज गलत रास्ते पर है।

हालांकि जिन भी लोगों ने इसे ग़लत ठहराया है, उनमें से अधिकतर लोगों का यही कहना है कि ये समाज के बनाए नियमों से बिल्कुल विपरीत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।लेकिन ऐसा कहने वालों में सिर्फ पुरुष हों ऐसा नहीं है। बहुत सी महिलाएं भी मानती हैं कि लड़की का शादी से पहले प्रेग्नेंट होना गलत है।

जूही मिश्रा मानती हैं कि ये पूरी तरह गलत है। किसी भी लड़की को सबसे पहले अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए और उसके बाद कहीं शादी, बच्चे के बारे में सोचना चाहिए। शादी से पहले मां बनना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर है।कमेंट करने वालों में कुछ ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि ये पाश्चात्य सोच है और इस पर अमल करना भारतीय सभ्यता को झुठलाने जैसा है।

बहस का मुद्दा
हालांकि एक बड़ा वर्ग ये भी मानता है कि ये एक बहस का मुद्दा है और इस पर एक या दो लाइन में फ़ैसला नहीं सुनाया जा सकता है।पर औरत को चरित्रहीन कहने वालों की भी कमी नहीं है। मुकेश इंस्टाग्राम पर लिखते हैं शादी एक जिम्मेदारी है और जो जिम्मेदारी नहीं उठा सकता उसे बच्चे पैदा करने का कोई हक नहीं है। लोगों के विचारों में काफी अंतर है लेकिन एक बड़ा वर्ग है जो ये मानता है कि शादी के पहले प्रेग्नेंट होना गलत है।

महिला मुद्दों पर काम करने वालों की राय
हालांकि बेवसाइट फेमिनिज़्म इन इंडिया की एडिटर जपलीन पसरीचा का मानना है कि लोगों की ऐसी सोच कहीं न कहीं ये दिखाती है कि आज भी लोग लड़कियों की सेक्शुएलिटी को कंट्रोल करने में लगे हुए हैं।

जपलीन कहती हैं कि उन्होंने नेहा धूपिया की तस्वीर तो नहीं देखी है और न ही कमेंट पढ़े हैं लेकिन आज भी एक लड़की अगर शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाती है तो लोगों को ये सही नहीं लगता। आज भी समाज सोचता है कि एक औरत की सेक्शुएलिटी तय करना उनकी जिम्मेदारी है और वो ही ये तय करेंगे।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में वूमन स्टडीज की असोसिएट प्रोफेसर फिरदौस अजमत सिद्दिकी मानती हैं कि हमारे समाज में शादी के पहले अगर कोई महिला प्रेग्नेंट हो जाए तो समाज उसे स्वीकार नहीं करता है।"वो कहती हैं कि शादी नाम की संस्था ही वंश वृद्धि के लिए बनाई गई है। ऐसे में जब कोई महिला शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाती है तो समाज उसे स्वीकार नहीं कर पाता है। "

हालांकि फिरदौस मानती हैं कि ये पूरी तरह महिला पर निर्भर होना चाहिए कि वो कब मां बनना चाहती है लेकिन वो इस बात से भी इनकार नहीं करती हैं कि अगर कोई औरत शादी के पहले प्रेग्नेंट हो जाए तो लोग पुरुष को कुछ नहीं कहते जबकि सारे इल्जाम महिला पर ही थोप दिए जाते हैं। जो गलत है।

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